DLC Full Form in Hindi ( Game + Medical)

क्या आपको पता है कि dlc full form क्या होता है। dlc एक ऐसा वर्ड है जिसका प्रयोग विभिन प्रकार से अलग-अलग वस्तुओ के लिए किया जाता है। dlc का प्रयोग medical के छेत्र में ज़्यादा किया जाता है। अगर आपको dlc के बारे में जानकारी नही है, तो कोई बात नही है,आज की पोस्ट में हम dlc full form के साथ dlc test के बारे में पूरी जानकारी बताने वाले है।

DLC Full Form in Hindi ( Game + Medical)

Dlc क्या है और dlc full form in hindi के बारे में जानकारी 

Dlc की full form के बारे में जानने से पहले हमें यह पता कर लेना चाहिए कि dlc क्या होता है। क्योंकि हमें जब तक dlc के बारे में सही से पता नही चलता तब तक dlc full form को याद रखने में भी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। dlc का फुल फॉर्म differential leukocyte count होता है। आगे dlc के बारे में आपको पूरी जानकारी बताई जा रही है।

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DLC full form in hindi.

मेडिकल साइंस में dlc का मतलब Differential Leukocyte Count  से लिया जाता है। dlc को हिंदी में विभेदक ल्यूकोसाइट गिनती के नाम से पहचाना जाता है। यह नाम याद रखने में कठिन होने के कारण इसे dlc full form के शार्ट नाम से पहचाना जाता है। dlc एक सामान्य टेस्ट है जीने सफेद रक्त कणिकाओं का अध्यन करके बीमारी का पता लगाया जाता है।

DLC क्या होता है

Dlc एक प्रकार का टेस्ट होता है जिससे हमारे शरीर मे होने वाली बीमारियों का पता लगाया जाता है। जब हम बीमार हो जाते है तो हम डॉक्टर के पास जाते है, लेकिन जब आपकी सेहत थोड़ी ज़्यादा खराब होती है, तो डॉक्टर भी शरीर को बाहर से देखकर बीमारी का पता लगाने में असमर्थ होता है। इसलिए डॉक्टर मरीज की सेहत का निरीक्षण करने के लिए एक टेस्ट करता है जिसको dlc टेस्ट कहा जाता है।

Dlc test एक सामान्य test होता है। इसमें हमारे शरीर के खून की जाच की जाती है,जिससे हमें भुखार, खासी, सर्दी झुकाम, निमोनिया, पेशाब में समस्या, उल्टी की समस्या , ओर हमारे शरीर मे संक्रमण होने की स्तिथि में dlc test किया जाता है । सामान्य हमारे शरीर में किसी भी प्रकार की बीमारी होने और इस test की जांच की जाती है, क्योंकि इससे डॉक्टर आपकी बीमारी को बहूत जल्दी पकड़ लेता है। इससे शरीर मे प्रतिरोधक झमता का विकास करने में सहायता प्राप्त होती है।

सफेद रक्त कणिकाओं के बारे में जानकारी

Dlc test में हमारे शरीर के सफेद रक्त कोशिकाओं का अध्ययन किया जाता है। इसको medical की भाषा मे white blood cell के नाम से जाना जाता है। सफेद रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर को बीमारियों से बचाने के लिए प्रतिरोधकता का कार्य करती है। जब हमारे शरीर मे कोई बीमारी बढ़ जाती है , तो wbc cells शरीर मे एंटीबाडी का निर्माण करता है, जिससे होने वाली बीमारी का असर खत्म हो जाता है ओर धीरे धीरे बीमारी को खत्म कर देता है।

जब हम बीमार पड़ते है तो हमारे शरीर मे white blood cells की कोशिकाओं में कमी या अधिकता देखने को मिलती है। अगर dlc test में कोशिकाओं की संख्या कम या ज़्यादा मिलती है, तो ऐसी स्तिथि में आपके शरीर मे बीमारी देखने को मिलती है। full form of dlc के बारे में जानने से पहले आपको पता होना चाहिए ,की हमारे शरीर मे सफेद रक्त कोशिकाएं कितने प्रकार की होती है । और इनके क्या कार्य होते है।

सफेद रक्त कोशिकाएं पाँच प्रकार की होती है, ओर पाँचो सफेद रक्त कोशिकाओ का अलग अलग कार्य होते है।

  1. लिम्फोसाइटों
  2. मोनोकीट्स
  3. न्यूट्रोफिल
  4. बासोफिल्स
  5. इओसिनोफिल्स

अगर इनमे में किसी भी कोशिकाओं की संख्या कम या ज़्यादा देखने को मिलती है, तो ऐसी स्तिथि में डॉक्टर इन्हें सामान्य बनाने के लिए दवाई देते है।

Differential Leukocyte Count टेस्ट कैसे किया जाता है (Dlc Full Form)

अगर आप dlc टेस्ट करवाने के लिए जा रहे हो,तो डरने की कोई बात नही है। इसमे डॉक्टर या नर्स आपके शरीर से खून का एक सेम्पल लेते है। इस सैंपल को मशीन की सहायता से टेस्ट करके सही नतीजो पर पहुचते है। आपके हर white blood Cells का टेस्ट करने के लिए एक विशेष प्रकार का पैटर्न बनाकर किरणों की सहायता से सफेद रक्त कोशिकाओं की गणना की जाती है। अगर आपके शरीर मे कोशिको की गणना सामान्य से कम या ज़्यादा आती है ,तो ऐसी स्तिथि में आपका शरीर कमजोर होता है। इससे हमारी शरीर के कई लक्षण जुड़े हुए होते है।

  1. अचानक से वजन घटना या बढ़ना
  2. व्यक्ति को हमेशा थकान का अहसास होने
  3. सिर में दर्द होना
  4. शरीर मे कंकम्पी होना
  5. बार बार बुखार का आना

Dlc के सामान्य रिजल्ट के बारे में जानकारी 

इसमे शरीर के wbc की कमी या अधिकता का अध्ययन किया जाता है। अगर मरीज में सफेद रक्त कोशिकाओं  की संख्या निर्धारित की गई संख्या से कम या ज़्यादा आती है , तो शरीर मे असमानता की निशानी मानी जाती है। और अगर इनमे असमानता आती है,तो व्यक्ति के बीमार होने का संकेत होता है। यहां पर हम आपको एक सामान्य wbc की स्तिथि के बारे में बता रहे है।

  • बेसोफिल्स: 0.5%-1%
  • इओसिनोफिल्स: 1%-4%
  • न्यूट्रोफिल्स: 40%-60
  • बैंड (यंग न्यूट्रोफिल्स): 0%-3%
  • मोनोसाइट्स: 2%-8%
  • लिम्फोसाइट्स: 20%-40%

अगर हमारी dlc test के result दिए गए प्रतिशत से कम या ज़्यादा आते है, तो आपके बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।

सन 2019 में कोरोना ने पूरी दुनिया को तहस नहस करके रख दिया था। लेकिन जिन लोगो के शरीर मे white blood cells यानी सफेद रक्त कोशिकाओं में प्रतिरोधकता का निर्माण किया है ,वह मरीज अन्य मरीजो की तुलना में बहूत जल्दी ठीक हुए है। ओर इनको किसी प्रकार की वैक्सीन की जरूरत भी नही पड़ी ।

आपने प्लाज़्मा का नाम तो सुना ही होगा, जिसका 2019 में इस बीमारी से लड़ने के लिए काफी लोगो से प्लाज़्मा डोनेट करने के लिए कहा गया था। यह प्लाज़्मा हमारे शरीर के सफेद रक्त कोशिकाओ से ही निकाल जात है। ओर जिन मरीजो की सेहत ज़्यादा खराब होती है,उनको दिया जाता है।

सफेद रक्त कोशिकाओं के बढ़ने पर शरीर मे होने वाले परिवर्तन

एक सामान्य व्यक्ति के शरीर मे 4000 से 11000 तक wbc की कणिकाएं हो सकती है। जब ये कणिकाएँ सामान्य से अधिक हो जाती है, तो सफेद रक्त कोशिकाएं हमारे शरीर की रक्षा करने में असमर्थ हो जाती है। ओर जब यह असमर्थ हो जाते है, तो यह कोशिकाएं हमारे शरीर मे बीमारी के खिलाफ प्रतिरोधक झमता नही बना पती। इससे हमारे शरीर मे बीमारी काफी हद तक बढ़ जाती है, ओर एक समय बाद हम बीमार पड़ जाते है। ऐसी स्तिथि में हमे डॉक्टर सफेद रक्त कोशिकाओं की संख्या सांमन्य करने करने के लिए ट्रीटमेंट देते है। जिससे हमारे शरीर में रोग प्रतिरोधकता का निर्माण होता है

Faqs

DLC की दवा का हमारे गुर्दे पर क्या प्रभाव पड़ता है।

Dlc की दवा हमेशा डॉक्टर की देख रेख में ही लेनी चाहिए। क्योंकि dlc का प्रभाव हमारी किडनी पर पड़ता है। ऐसे में अगर आपसे dlc की दवा लेने में थोड़ी बहूत गलतियां हो गई , तो आपकी किडनी भी खराब हो सकती है।
इसलिए इस दवा का उपयोग डॉक्टर की अनुमति से ही लेना चाहिए। इस दवा के माध्यम से आपके शरीर मे Wbc के स्तर को बनाये रखने में सहायता मिलती है। लेकिन इसकी थोड़ीसी कम ज़्यादा की मात्रा आपके शरीर को नुकशान पहुचा सकती है।

क्या ह्दय की बीमारी वाले लोग DLC की दवा का सेवन कर सकते है।

ह्दय की बीमारी वाले लोगो को dlc की दवा लेने से बचना चाहिए। अगर कभी दावा लेने की जरूरत पड़े तो ,डॉक्टर की सलाह के बाद ही dlc की दवा का सेवन करना चाहिए। ह्दय के मरीजो के लिए चेतावनी भी दी गई है,इसलिए आपको ऐसी गलती कभी नही करनी चाहिए जो बाद में भारी पड़े।

स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए dlc की दवा कितनी सही है।

अगर स्तनपान करवाने वाली महिलाएं इस दवा का सेवन करती है, तो उसका प्रभाव महिला और बचे दोनों पर पड़ता है। इसलिए dlc की दवाई का गलत सेवन आपके ओर आपके बचे दोनों की जान मुसीबत में डाल सकता है। इसलिए स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इसके अलावा किडनी के मरीज, बुखार के समय, मौसमी बीमारिया होने पर, पथरी की बीमारी होने पर  dlc की दवाई का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करना चाहिए।

निष्कर्ष

इस पोस्ट में हमने dlc full form के बारे में ओर dlc test के बारे में बताया है। यह एक सामान्य टेस्ट है ,जिसमे हमारे शरीर की सफेद रक्त कोशिकाओं (सफेद खून) की जाँच करके मरीज के शरीर मे होने वाली बीमारियों के बारे में पता लगाया जाता है। अगर हमारे शरीर मे white blood cells कोशिकाओं की संख्या सही नही मिलती है, तो ऐसी स्तिथि में आपको सही डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

अगर आपके मन मे dlc full form से संबंधित कोई सवाल है, या फिर आप dlc test करवाने के लिए जा रहे हो ,तो किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्त करने के लिए कमेंट करके पूछ सकते है। हमारी टीम आपकी सहायता करने की पूरी कोसिस करेगी।

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